अमेरिका की मुद्रा निगरानी सूची में भारत बरकरार

वाशिंगटन

अमेरिका के वित्त विभाग ने भारत को अपनी मौद्रिक निगरानी सूची में बरकरार रखा है। भारत समेत कुल 12 देशों की मुद्राओं की स्थिति पर अमेरिका ने करीबी निगाह रखने का फैसला किया है।
अमेरिकी वित्त विभाग की तरफ से जारी मौद्रिक निगरानी सूची में भारत को उन 12 देशों में शामिल रखा गया है। इन सभी देशों की मुद्राओं की उठापटक और वृहद-आर्थिक नीतियों पर करीबी निगाह रखी जाएगी।
इस सूची में भारत के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, इटली, मलेशिया, सिंगापुर, थाइलैंड, ताइवान, वियतनाम और मेक्सिको शामिल हैं।
ताइवान और वियतनाम को छोडक़र बाकी सभी देश दिसंबर 2021 में आई पिछली निगरानी सूची में भी शामिल थे।
अमेरिका के वित्त मंत्री जेनेट एल येलन ने भारत को इस सूची में शामिल करने की वजह बताते हुए कहा कि अमेरिका के साथ अहम द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष की स्थिति है। इसके अलावा भारत बीती अवधि में लगातार, एकतरफा मौद्रिक हस्तक्षेप में भी लिप्त रहा है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास चौथा सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार (569.9 अरब डॉलर) है। चीन के पास 3.2 लाख करोड़ डॉलर, जापान के पास 1.2 लाख करोड़ डॉलर और स्विट्जरलैंड के पास एक लाख करोड़ डॉलर की विदेशी मुद्रा है।
येलन ने कहा, अमेरिकी प्रशासन अपने प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के लिए एक मजबूत और टिकाऊ वैश्विक सुधार का समर्थन करने के लिए नीति उपकरणों को सावधानीपूर्वक जांचने की मजबूती से वकालत करता है। असमान वैश्विक सुधार होना एक मजबूत सुधार नहीं है। यह असमानता को बढ़ाता है, वैश्विक असंतुलन को बढ़ाता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ाता है।

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