रंगमंच बच्चों की कल्पना को जगाने का बड़ा माध्यम: प्रो.डंगवाल
देहरादून। रंगमंच बच्चों की कल्पना को जगाने का एक बड़ा माध्यम है। यह बच्चों को समग्र रूप से खुद को अभिव्यक्त करने में मदद करता है। इस प्रकार की गतिविधियाँ मस्तिष्क के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक हैं। ये बात दून विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के बच्चों के लिए दो सप्ताह की थिएटर कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कही। पहले दिन ही प्रतिभागी बच्चों ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया और हर्षोल्लास के साथ गतिविधियों में भाग लिया। बच्चों को मूल्यवान व्यक्तित्व-निर्माण कौशल सीखते विकासशील बच्चे इनसे सबसे अधिक लाभान्वित होते हैं। स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस की समन्वयक डॉ. चेतना पोखरियाल ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम संस्था को अपने सामुदायिक आउटरीच प्रयासों में मदद करते हैं और बच्चों की वृद्धि और विकास में योगदान देना समाज में योगदान करने का सबसे अच्छा तरीका है। लोक और प्रदर्शन कला विभाग के प्रशिक्षक डॉ. अजीत पंवार इस तरह की कार्यशाला पूर्व मे भी अलग अलग स्थानों पर करा चुके हैं। कला विभाग के डॉ. राजेश भट्ट ने बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने वाले व्यायाम और गतिविधियां सिखाएंगे। इस दौरान प्रो. आरपी ममगाईं, प्रो. हर्ष डोभाल, डॉ. प्रीती मिश्रा, डॉ. तन्वी, डॉ. स्मिता, डॉ. गजाला खान, डॉ. अदिति बिष्ट, मेहुल रावत और अपूर्वा सिवाली मौजूद रहे।
