Congress ने जातिगत जनगणना की मांग राज्यसभा में उठायी
नयी दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने देश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को शिक्षा सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए कदम उठाये जाने की आवश्यकता पर जहां बल दिया, वहीं कांग्रेस ने जातिगत जनगणना की मांग उठायी, ताकि विभिन्न जातियों की सही संख्या पता लगने पर उनके कल्याण के लिए समुचित कदम उठाये जा सके। भाजपा सदस्यों ने चर्चा में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि ओडिशा सहित कई राज्यों में कांग्रेस के कई दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद विभिन्न जनजातियों के लोगों को संविधान में प्रदत्त आरक्षण का अधिकार लंबे समय तक नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अब इस काम को केंद्र की नरेंन्द्र मोदी सरकार कर रही है।
उच्च सदन में संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक 2024 और संविधान (अनुसूचित जाति एवं जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक 2024 पर एक साथ हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के एल हनुमंतय्या ने कहा कि सरकार को अनुसूचित जाति एवं जनजाति की सूची की समग्रता से समीक्षा करनी चाहिए, ताकि उनकी विसंगतियां दूर हो सकें। उन्होंने इस बात पर हैरत जतायी कि सरकार सभी जातियों की जनगणना क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने इस बारे में सरकार से विचार करने की मांग की। उन्होंने सरकारी विभागों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के रिक्त पड़ें पदों पर भर्ती करने को कहा।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि एक तरफ तो सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को सशक्त बनाने की बात करती है, वहीं देश के एकमात्र आदिवासी मुख्यमंत्री को केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के जरिये उसने पद से हटने के लिए विवश किया। चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि इस विधेयक के संसद में पारित होने के बाद कानून के रूप में लागू होगा तो यह संबंधित समुदाय के लोगों के लिए उसी तरह के उल्लास का विषय होगा जैसा देश ने अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने पर मनाया था। उन्होंने कहा कि इससे इस वर्ग पर काफी सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ेगा।
प्रधान ने कहा कि ओडिशा के ये समुदाय दशकों से इसकी मांग कर रहे थे और आज यह लोकतंत्र की जीत है कि यह सुविधा उस वर्ग तक पहुंचायी जा रही है। उन्होंने यह विधेयक लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने आज जो काम किया है वह आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अपेक्षाओं के अनुरूप हो रहा है। प्रधान ने कांग्रेस सदस्य हनुमंतय्या से कहा कि ओडिशा की चार आदिम जातियां दशकों से अपने संवैधानिक अधिकार मांग रहे थे और ओडिशा में कांग्रेस की सरकार कई वर्षों तक रहने के बावजूद उन्हें यह अधिकार नहीं दिया गया।
प्रधान ने साढ़े चार करोड़ उड़िया लोगों की तरफ से यह विधेयक लाने पर केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार और उनके मंत्री जुएल ओराम तथा अब मोदी सरकार एवं उनके मंत्री अर्जुन मुंडा ने ओडिशा के आदिवासियों की सुध ली है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी है कि एक भी (आरक्षण के) अधिकारी व्यक्ति को वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि ओडिशा सहित देश के किसी भी राज्य में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार से छेड़छाड़ नहीं की जाए।
प्रधान ने ओडिशा में आदिवासियों को उनकी जमीन गिरवी रखने का अधिकार देने के सरकार के फैसले को वापस लिये जाने पर बधाई दी, क्योंकि इसका दुरुपयोग होने की आशंका थी। इसके बाद बीजद के सस्मित पात्रा ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि कोई केंद्रीय मंत्री राज्यों के मंत्रिमंडल के निर्णय पर सवाल नहीं उठा सकता और यदि ऐसा होता है तो यह लोकतंत्र के लिए दुखद दिन होगा। इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने तो ओडिशा सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री उच्च सदन के सदस्य हैं और वह एक सदस्य के नाते किसी विषय पर अपने विचार रख सकते हैं, संविधान ने यह अधिकार उन्हें दिया है।
