पूर्वजों की परंपराओं को निभा रही गांव बलाड़ की महिलाएं
देहरादून
पर्यावरणविद् वृक्षमित्र डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी ने कहा है कि आज जहां फैशनिकरण से पूरा समाज अछूता नहीं है वहीं आज भी चमोली जनपद के सीमांत ब्लाक देवाल का अंतिम गांव बलाड़ की महिलाएं अपनी पूर्वजों के वेशभूषा, रीति रिवाजों व परंपराओं को निभा रहे हैं। यहां पर्यावरणविद् वृक्षमित्र डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी ने कहा हैं कि उत्तराखंड के कई गांव आज भी ऐसे हैं जो अपने पहनावे, पोशाक, रीति रिवाजों व परम्पराओं से अपनी अलग पहचान बनाये हुए हैं जितनी सुंदर इनके वेशभूषा व पहनावे हैं उतने ही सुंदर, खूबसूरत जगह में यह लोग रहते हैं आज इन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की जरुरत हैं। उन्होंने कहा कि और इन खूबसूरत स्थानों, पहनावे की पोशाक को पर्यटन से जोड़ा जाय ताकि ये परम्परा भी बची रहे और इन पिछड़े क्षेत्रों का विकास भी हो सके। मंजू देवी कहती हैं कि यह पिछोड़ा पहनावे की परंपरा हमारे बुजुर्गों की देन हैं और इसे हम अपने हर कार्य में पहनते हैं।
