पीसीबी ने दो वरिष्ठ अधिकारियों समेत 17 को दिखाया घर का रास्ता
भोपाल,
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) में मन लगाकर काम नहीं करना 17 अतधिकारी-कर्मचारियों को महंगा पड़ गया। इन्हें सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर घर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें दो वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, एक काय्रपालन यंत्री व बाबू से लेकर भृत्य तक शामिल हैं। इनमें से दस को तो आदेश दिनांक से ही घर बैठा दिया है, बाकी को तीन माह का समय दिया है। वहीं लंबे समय से एक ही दफ्तर में जमे 75 अतधिकारी, कर्मचारियों के तबादले कर दिए हैं। ये सभी कार्रवाई बीते 25 दिनों में की है, जो कि मप्र के किसी विभाग में कोरोना महामारी के बाद की गई पहली बड़ी कार्रवाई हे। हालांकि, इसका विरोध भी हो रहा है। बता दें कि पीसीबी पर्यावरण विभाग के अंतर्गत आता है। बोर्ड के पास 450 अधिकारी, कर्मचारियों का अमला है। आठ माह पूर्व ही अनिरुद्ध मुखर्जी को बोर्ड का चेयनमैन बनाया गया है। वे ही पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव भी हैं। चेयरमैन का काम संभालने के बाद उन्होंने बोर्ड के अधिकारियों की छानबीन समिति बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई की है। इन्हें तुरंत दी सेवानिवृत्ति : शीघ्रलेखक ग्रेड-दो विनय कुमार केमिया शहडोल व कृष्णा मेहता इंदौर, उच्च श्रेणी लिपिक आशा राठौर इंदौर, लेखापाल विजय शंकर पाठक कटनी, निम्न श्रेणी लिपिक गीता तिवारी भोपाल व वाहन चालक गोपाल पांडे रीवा, भृत्य सुरेश सोनबड़े उज्जैन अर्जुन सिंह परिहार इंदौर व शोभा ढोके भोपाल, रसायनज्ञ अनूप कुमार श्रीवास्तव सतना शामिल हैं। इन्हें तीन माह बाद दी सेवानिवृत्ति : वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी प्रेमचंद उचारिया भोपाल व आमोल दास संत उज्जैन, कार्यपालन यंत्री रमेश कुमार रोहितास ग्वालियर, वैज्ञानिक आनंद किशोर दुबे शहडोल, वैज्ञानिक राहुल द्विवेदी कटनी, सहायक यंत्री अरविंद तिवारी छिंदवाड़ा, मुख्य रसायन यज्ञ सुनील श्रीवास्तव उज्जैन को अनिवार्य सेवानिविृत्ति दे दी है लेकिन तीन माह बाद ये काम बंद करेंगे। तबादला के कमुछ उदाहरण – डायरेक्टर हेमंत शर्मा लंबे समय से भोपाल में पदस्थ थे, उन्हें जबलपुर का आंचलिक अधिकारी बनाकर भेजा गया। अधीक्षण यंत्री एचएस मालवीय भी लंबे समय से राज्य कार्यालय में कामकाज कर रहे थे, उन्हें ग्वालियर का क्षेत्रीय अधिकारी बनाया गया है। ये हैं नियम 3 ऐसे शासकीय सेवक जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई हो व इसके अलावा उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज हो तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। इसके लिए संबंधित द्वारा 20 वर्ष की सेवा अवधि या 50 वर्ष की आयु पूरी करना अनिवार्य है। आगे क्या : जिन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है, उनके पास कोर्ट जाने का विकल्प बचा हुआ है। सेमी गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन के अध्यक्ष अनिल वाजपेयी का कहना है कि काम में सुधार करने के मौके देने चाहिए। इस तरह कार्रवाई से संबंधितों का परिवार परेशान है। ठीक नहीं है। वहीं, कुछ लोग इस तरह की कार्रवाई को जनता के हित में बता रहे हैं। छानबीन समिति पर भी सवाल उठ रहे हैं, चर्चा है कि इनमें शामिल कुछ अधिकारी खुद वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। कुछ लोग इसे आपसी खींचतान भी बता रहे हैं।
