उपहार अग्निकांड-रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर अंसल बंधुओं से जवाब तलब

नई दिल्ली

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में सबूतों से छेड़छाड़ के लिए रियल एस्टेट कारोबारी सुशील तथा गोपाल अंसल से उनकी सजा बढ़ाने का अनुरोध करने वाली पीड़ितों की याचिका पर सोमवार को जवाब मांगा। अंसल बंधुओं को इस आधार पर जेल से रिहा कर दिया गया कि वे आठ नवंबर 2021 से ही जेल में बंद थे और उन्होंने पहले ही सजा काट ली है।
गौरतलब है कि एक मजिस्ट्रेट अदालत ने आठ नवंबर 2021 को रियल एस्टेट कारोबारियों को सात साल की जेल की सजा सुनाई थी, तथा तब से वे जेल में ही बंद थे। इसके बाद जिला न्यायाधीश ने 19 जुलाई को सजा पर मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में संशोधन कर अंसल बंधुओं, अदालत के पूर्व कर्मचारी दिनेश चंद शर्मा तथा अंसल बंधुओं के तत्कालीन कर्मचारी पी पी बत्रा की रिहाई का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि ये लोग आठ नवंबर 2021 से ही जेल में बंद है तथा इस ही पूरी सजा मानते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति आशा मेनन ने ‘एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रेजडी’ (एवीयूटी) की याचिका पर अंसल बंधुओं और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 11 अक्टूबर की तारीख तय की। सुनवाई के दौरान प्रदेश की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे याचिका का समर्थन करते हैं और जेल की सजा पहले ही काट लेने पर अंसल बंधुओं को रिहा करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाले हैं।
वरिष्ठ वकील विकास पहवा ने याचिकाकर्ता संगठन की पैरवी करते हुए सजा पर निचली अदलत के आदेश को चुनौती दी तथा अनुरोध किया कि दोषी जेल की पूरी सात साल की सजा काटें। बहरहाल, जिला न्यायाधीश ने सुशील तथा गोपाल अंसल में से प्रत्येक पर लगाए 2.25 करोड़ रुपये के जुर्माने तथा दो अन्य पर लगाए तीन-तीन लाख रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था।

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