बाढ़ से सुरक्षा के लिए तटबंध निर्माण का मुद्दा उठाया
ऋषिकेश। बीते दिनों भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं से सौंग नदी में जल स्तर काफी बढ़ गया है। ग्राम सभा खड़कमाफ के खदरी में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यहां सौंग नदी के किनारे भूकटाव होने से आबादी क्षेत्र खतरे में है। खदरी में सौंग नदी के बढ़ते जल स्तर से धारा की दिशा बदल कर आबादी क्षेत्र की ओर हो गई है। इससे न केवल नदी तट की ओर बसे ग्रामीण परिवारों को खतरा पैदा हो गया है, बल्कि सौंग नदी की धारा बायीं छोर की ओर ढलने से समस्त खादर क्षेत्र खतरे में आ गया है। यहां सौंग नदी हिन्दुस्तान गैस गोदाम के समीप बहने लगी है। सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2006 में लगाये गए सीमेंट के ब्लॉक और स्पर ढलने से खादर क्षेत्र में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। इससे समूचे खादर क्षेत्र पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। जिला गंगा सुरक्षा समिति के नामित सदस्य विनोद जुगलान का कहना है कि ठाकुरपुर से लेकर खदरी तक सौंग नदी की बाढ़ से सुरक्षा को तटबंध निर्माण की फाइल वर्ष 2014 से केंद्रीय जल आयोग में अटकी हुई है। बाढ़ नियंत्रण का कार्य देख रहे सिंचाई विभाग के अधिकारियों की हीलाहवाली की वजह से आज तक सुरक्षा तटबन्ध का कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में ग्रामीणों के जानमाल सहित जीविकोपार्जन के एक मात्र साधन कृषि भूमि के बह जाने की आशंका लगातार प्रबल हो रही है। क्षेत्र के किसानों ने शीघ्र ही सुरक्षा तटबंध बनाने की मांग की है। मांग करने वालों में पूर्व सैनिक राम प्रसाद जुगलान, सुंदरमणि शास्त्री, नारायण सेतु, लाखी राम रतूड़ी, ख़ुशी राम रतूड़ी, चंडी प्रसाद भट्ट, हरेंद्र भट्ट, मोहनलाल गैरोला, दया राम गैरोला, दिनेश रतूड़ी, राजा राम कुलियाल, देवेंद्र दत्त रयाल, सुरेंद्र प्रसाद, गजेंद्र रयाल, ओम प्रकाश, दिनेश प्रसाद, चंद्रमोहन भट्ट, विनोद प्रसाद आदि रहे।
