बनभूलपुरा प्रकरण: सभी ने आदालत के निर्णय का किया स्वागत
देहरादून
बनभूलपुरा मामले में सरकार के साथ राजनीतिक दलों ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया है। भाजपा ने पूर्ववर्ती सरकार पर इस समस्या को देने का आरोप लगाया है तो कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सुध नहीं लेने की बात कही।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनभूलपुरा मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह रेलवे की भूमि है सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आदेश पर ही आगे बढ़ेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा मामले में अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार अदालत के निर्णय के साथ है। हजारों परिवारों के सामने यह समस्या पूर्ववर्ती कांग्रेसी सरकारों की देन है। पूर्व में इस मुद्दे का हल निकाल लिया जाता तो आज यह समस्या खड़ी नही होती। अदालत ने अभी राज्य सरकार और रेलवे से जवाब मांगा है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि पीड़ितों की समस्या का समाधान हो सकेगा। मामले में राज्य सरकार पार्टी नही है और न ही राज्य का विषय, लेकिन भाजपा को उन हजारों परिवारों से सहानुभूति है। दूसरी ओर कांग्रेस इसे राजनैतिक अवसर के तौर पर देखती रही है और संभव है की उसकी कोशिशों पर विराम लग सकेगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने उच्चतम न्यायालय के स्थगन आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह सच्चाई की जीत है। कड़ाके की ठण्ड में बस्ती के लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ धरने में बैठ हैं, परन्तु सरकार ने उनकी सुध नही ली। लगभग 80 वर्षों से वहां पर निवास कर रहे लोगों को बेघर करने की अमानवीय कदम है। सरकार को इन लोगों के पुनर्वास की योजना प्रस्तुत करनी चाहिए थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बनभूलपुरा के लोगों को एक बड़ी राहत मिली है। इस निर्णय ने मानवीय चेहरे को बचा दिया। कड़कड़ती ठंड में लोग सड़कों पर आते राज्य सरकार की कमियों के चलते यह स्थिति पैदा हुई। हमने 2016 में मलिन वस्त्यिों के लिए कानून बनाया था। इस ओर ध्यान देकर इस समस्या का समाधान निकाला जाए। कांग्रेस के प्रेदश उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना ने इस सारी स्थिति के लिए राज्य की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि अब राज्य सरकार को आगे आ कर वर्ष 2016 में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के स्टैंड को न्यायालय के समक्ष रखते हुए इन सवा चार हज़ार परिवारों को राहत देनी चाहिए। जब रेलवे विभाग के पास इस जमीन की बाबत कोई गजट नोटिफिकेशन ही नहीं है तब कैसे फैसला होगा कि ये भूमि राज्य सरकार की है या रेलवे की।
