राजीव गाँधी ने रखी थी आधुनिक भारत की आधारशिला
लखनऊ
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के कार्यकाल में हुए वैज्ञानिक अनुसंधानों और तकनीकी क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति को उत्कर्ष संगोष्ठी के 24 वें चरण ने रेखांकित किया। विकासनगर स्थित फील फ्रेश कैफे में दो घंटे तक चली इस संगोष्ठी के माध्यम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के द्वारा भारत के आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर आमंत्रित वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये।
1984 से लेकर 1989 तक के पाँच वर्षों में एक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए राजीव गाँधी ने जिस प्रकार प्रख्यात वैज्ञानिक अब्दुल कलाम के माध्यम से भारत को अंतरिक्ष प्रक्षेपण, परमाणु आयुद्ध निमार्ण, मिसाइल टेक्नोलॉजी और सुपर कम्प्यूटर परम-1 के निर्माण तक योजनाओं को सामने लाकर भारत को सॉफ्टवियर निर्माण और आधुनिक संचार तकनीक की दुनिया में एक महाशाक्ति बना दिया था उसकी मिसाल दुनिया के किसी दूसरे नेता से नहीं दी जा सकती। राजीव गाँधी के जन्म दिवस पर आयोजित इस संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार संजीव पाण्डेय ने राजीव गाँधी को सफल प्रधानमंत्री बताते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किये। इस्लामिया कालेज के पूर्व उप प्रधानाचार्य वसीमउल्लाह हाशमी ने कहा कि उन्हें अपने जीवन में एक बार राजीव गाँधी और एक बार इंदिरा गाँधी से मुलाकात करने का अवसर प्राप्त हुआ था जिसे वे हमेशा याद रखते हैं। समाजसेवी मुशीर अहमद ने राजीव गाँधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। युवा वक्ता अन्वेष शुक्ला ने कहा कि राजीव गाँधी की आँखों में दिखाई पडऩे वाली चमक उनकी ईमानदारी का प्रमाण है। अनुमति शुक्ला ने बताया कि अपने जीवन में उन्हें राजीव गाँधी जैसा कोई दूसरा प्रभावशाली नेता आज तक नजर नहीं आया। मनीष शुक्ला ने राजीव गाँधी के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि एक वह समय था जब सब कुछ बहुत आसान और खुशगवार नजर आने लगा था और एक आज का दौर है जब हर चीज उलट-पलट गई लगती है। ऐसे दौर में जब कांग्रेस और देश की आजादी में जान कुर्बान करने वाले शहीदों के इतिहास को तोडऩे-मरोडऩे की नापाक कोशिशें चल रही हो तब राजीव गाँधी जैसे सबको साथ में लेकर चलने वाले प्रधानमंत्रियों को याद करने के लिए ऐसी संगोष्ठियों का आयोजन समय की मांग है। इस मौके पर शुऐब हाशमी एवं नदीम आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी संचालक विमल प्रकाश ने बताया कि उत्कर्ष संगोष्ठी का अलग चरण लखनऊ महानगर में मौजूद नवाबीकाल की ऐतिहासिक इमारतों की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित रहेगा।
