अंकिता भंडारी हत्याकांड की प्रारंभिक जांच में पाई गई प्रशासनिक लापरवाही के जिम्मेदारों पर की जाए कार्रवाई
देहरादून
महिला मंच की जिला संयोजिका निर्मला बिष्ट एवं तथ्यान्वेषण के लिए टीम के सदस्यों का कहना है कि अंकिता भंडारी की हत्या और प्रारंभिक जाँच में पाई गई प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार माना गया है। आज परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्यवाही होनी चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। यह इसलिए भी हुआ, क्योंकि आरोपी सत्तापक्ष से संपन्न लोग हैं और स्थानीय कर्मचारियों को प्रभावित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी जानकारी मिली है कि वहां भी पूर्व में कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था। वहां विशाखा गाइड लाइन या कार्य स्थल पर हिंसा 2013 कानून के तहत कोई भी आंतरिक शिकायत समिति नहीं थी और जिला स्तरीय समिति को जानकारी नहीं थी। ऐसा प्रतीत होता है कि साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास किया गया। यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों में पीड़िता और परिवार के पुनर्वास तथा राहत के लिए कोई स्थाई नीति बने, साथ ही पटवारी व्यवस्था को समाप्त कर पुलिस व्यवस्था लागू हो। उन्होंने कहा कि तथ्यान्वेशण दल (फैक्ट फाइंडिंग टीम) में उत्तराखंड महिला मंच, पीयूसीएल, जनवादी महिला समिति, जनांदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, सौलीडेरीटी फाउंडेशन, कर्नाटक विथ बिलकिस, महिला किसान अधिकार मंच, ऐपवा के सदस्य तथा पर्यटन विशेषज्ञ, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न छात्र संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल रहे।
