वन विकास निगम के कार्मिकों को अब मिली राहत

देहरादून

वन विकास निगम में 2016 में हुए स्पेशल ऑडिट के चलते कार्मिकों को न्यायालय के आदेशानुसार दी गयी वरिष्ठता व वन विकास निगम सेवाविनियम 1984 के अनुसार दो वर्ष दैनिक सेवा को समयमान, एसीपी में जोड़ने पर लगाई गयी आपत्तियों के कार्मिकों को वेतन में 50 प्रतिशत की कटौती के साथ 08 लाख से 35 लाख की देयता बनाई गयी थी। यहां तक कि सेवानिवृत्त हुए सैकड़ों कार्मिकों के देयक रोके गये थे। यहां जानकारी देते हुए वन विकास निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बीएस रावत ने बताया कि लगातार दो वर्ष तक लगातार विभिन्न चरणों मे किये गये आन्दोलन के पश्चात सरकार द्वारा दो वर्ष दैनिक सैवा को समयमान, प्रोन्नत वेतनमान में जोड़ने की अनुमति कैबिनेट में अनुमोदन होने के पश्चात वन विकास निगम के कुछ कार्मिकों को राहत मिली है। उन्होंने बताया कि न्यायालय के अनुसार 1980 से कार्य कर कार्मिकों को 1991 से नियमित कार्मिकों की भांति सेवा लाभ देने के निर्देश के अनुसार मिल रहे वरिष्ठता के लाभ पर लगाई गयी आपत्ति पर निर्णय को शासन स्तर पर लिया जाना है। उन्होंने कहा कि जिसके लिए लगातार संघ अनुरोध करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव वन के द्वारा आश्वासन दिया गया था चुनाव के दौरान आँडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिये वित्त के साथ बैठक कर आपत्तियों का निस्तारण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इसी अनुरोध के साथ संघ के पदाधिकारियों द्वारा प्रबन्ध निदेशक वन विकास निगम से अनुरोध किया कि शीघ्र बैठक कर पूर्व मे हुई सहमति के अनुसार निस्तारण किया जाय। उन्होंने कहा कि प्रबन्ध निदेशक डी जे के शर्मा द्वारा आश्वासन के साथ कहा गया कि वन विकास निगम द्वारा ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण हेतु पत्र शासन को लिखा गया जिस पर शासन शीघ्र वित्त के साथ बैठक कर निस्तारण करेगा। उन्होंने कहा कि जिसमंे वन विकास निगम द्वारा न्यायालय के द्वारा किये गये आदेशों के अनुसार 2002 में नियमित हुए कार्मिकौ को 1991 से नियमित कार्मिकों की भांति सुविधा दी गयी है जिसके अनुरूप वन विकास निगम द्वारा वेतन निर्धारण किया था। उन्होंने कहा कि ऑडिट करते समय न्यायालय के आदेशों का संज्ञान नहीं लिया गया। उन्हांेने कहा कि इस विषय पर वन निगम प्रबंधन तंत्र गम्भीर है। उन्होंने कहा कि शीघ्र आपत्तियों का निस्तारण होगा। इस संघ के अध्यक्ष बी एस रावत ,उपाध्यक्ष टी एस बिष्ट, क्षेत्रीय अध्यक्ष दिवाकर शाही, आरपी सनवाल आदि शामिल रहे।

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